Former umpire V Vikramraju, who officiated in tied Chennai Test in 1986, dies – पूर्व अंपायर का निधन
एक महान अंपायरिंग युग का अंत
क्रिकेट प्रशंसकों और खेल जगत के लिए रविवार का दिन एक बेहद भावुक और दुखद खबर लेकर आया। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच साल 1986 में चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए ऐतिहासिक टाई टेस्ट मैच में अंपायरिंग करने वाले पूर्व अंतर्राष्ट्रीय अंपायर वी विक्रमराजू अब हमारे बीच नहीं रहे। बेंगलुरु में 92 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ सहित पूरे भारतीय क्रिकेट समुदाय में गहरे शोक की लहर है। वी विक्रमराजू ने अपने जीवन के कई दशक खेल की सेवा में समर्पित किए और मैदान पर अपनी सत्यनिष्ठा के लिए हमेशा सम्मानित किए गए।
वी विक्रमराजू का गौरवशाली क्रिकेट सफर
वी विक्रमराजू का अंपायरिंग करियर बेहद प्रतिष्ठित रहा। उन्होंने अपने करियर में कुल दो टेस्ट मैचों और पांच एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (ODI) मैचों में मैदानी अंपायर के रूप में अंपायरिंग की। इसके अलावा, उन्होंने 42 प्रथम श्रेणी मैचों में भी अंपायर की भूमिका निभाते हुए खेल को निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ाया। हालांकि, उनके करियर का सबसे यादगार और ऐतिहासिक पल वही चेन्नई टेस्ट था, जिसने उन्हें क्रिकेट इतिहास की किताबों में हमेशा के लिए अमर कर दिया। वह मुकाबला आज भी क्रिकेट प्रशंसकों के दिलों में रोमांच पैदा कर देता है।
चेन्नई का वह ऐतिहासिक टाई टेस्ट मैच
साल 1986 में 18 से 22 सितंबर के बीच चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला गया भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच का मुकाबला साधारण मैच नहीं था। यह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का केवल दूसरा ऐसा मुकाबला था जो टाई पर समाप्त हुआ था। इससे पहले साल 1960 में ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया मुकाबला क्रिकेट इतिहास का पहला टाई टेस्ट मैच था। इस तरह के महा-मुकाबले में अंपायरिंग का दबाव बेहद असाधारण होता है, लेकिन विक्रमराजू ने मैदान पर शांत रहकर अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन किया।
रोमांचक अंतिम क्षण और वह ऐतिहासिक फैसला
इस मुकाबले का अंत बेहद नाटकीय और ऐतिहासिक रहा। भारत को जीत के लिए अंतिम पारी में 348 रनों का लक्ष्य मिला था। भारतीय टीम ने शानदार बल्लेबाजी की और जीत के बेहद करीब पहुंच गई थी। जब भारत का स्कोर 9 विकेट पर 347 रन था, तब टीम को जीत के लिए मात्र 1 रन की आवश्यकता थी। इसी बेहद दबाव वाले क्षण में, ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर ग्रेग मैथ्यूज की गेंद पर अंपायर वी विक्रमराजू ने भारत के अंतिम बल्लेबाज मनिंदर सिंह को एलबीडब्ल्यू (lbw) आउट करार दे दिया। इस निर्णय के साथ ही भारतीय टीम की पारी समाप्त हो गई और मैच टाई हो गया। इस ऐतिहासिक मैच में दारा दोतीवाला दूसरे मैदानी अंपायर थे। इस फैसले के बाद विक्रमराजू को कुछ आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी खेल भावना और निष्पक्षता का परिचय दिया। यह तीन मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट था, जो बाद में 0-0 से ड्रॉ पर समाप्त हुई थी।
कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) की भावभीनी श्रद्धांजलि
विक्रमराजू के निधन पर कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) ने गहरा शोक व्यक्त किया है। संघ द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘यह अत्यंत गहरे दुख और शोक का विषय है कि कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ के अध्यक्ष और प्रबंध समिति पूर्व अंतर्राष्ट्रीय अंपायर वी विक्रमराजू के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं। उन्होंने कई दशकों तक पूरी सत्यनिष्ठा और विशिष्टता के साथ क्रिकेट खेल की सेवा की। एक अंपायर के रूप में, उन्होंने खेल के उच्चतम स्तरों पर अपनी पहचान बनाई और सम्मान अर्जित किया।’
खेल के प्रति आजीवन समर्पण
मैदानी अंपायरिंग से संन्यास लेने के बाद भी वी विक्रमराजू क्रिकेट से दूर नहीं हुए। उन्होंने खेल के विकास में अपना योगदान जारी रखा और एक मैच रेफरी के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने चार प्रथम श्रेणी मैचों में मैच रेफरी की भूमिका निभाई। इसके साथ ही, उन्होंने कर्नाटक प्रीमियर लीग (KPL) में भी रेफरी के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसे वर्तमान में ‘केएससीए महाराजा टी20 ट्रॉफी’ के रूप में जाना जाता है। उनका पूरा जीवन क्रिकेट को समर्पित था और उन्होंने हमेशा खेल के मूल्यों को सर्वोपरि रखा। वी विक्रमराजू का जाना वास्तव में भारतीय क्रिकेट के एक सुनहरे अध्याय का अंत है, लेकिन खेल के मैदान पर उनके द्वारा लिए गए निर्णय और उनकी सत्यनिष्ठा हमेशा युवा अंपायरों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
